यूआईडीएआई

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प्रतीक चिन्ह प्रारंभ करना

आधार- विशिष्ट पहचान का ब्राण्ड नाम एवं प्रतीक चिन्ह।

विशिश्ट पहचान संख्या का ब्राण्ड नाम आधार होगा। यूआईडीएआई द्वारा जारी किये जाने वाले विशिश्ट संख्या का नाम एवं प्रतीक चिन्ह संभावित परिवर्तनकारी कार्यक्रम को ध्यान में रखकर विकसित किया गया है। साथ ही यह पूरे देश में यूआईडीएआई के जनादेश के सार एवं भावना को सूचित करेगा।

यूआईडीएआई का जनादेश प्रत्येक भारतीय निवासी के विशिष्ट पहचान संख्या को उसके जनसांख्यिकीय एवं बायोमेट्रिक जानकारी के साथ जोड़ा जाना है ताकि वह भारत में कहीं भी अपनी पहचान स्थापित कर सके तथा लाभ एवं सेवाओं का उपयोग कर सके। विशिष्ट संख्या (जिसे अब तक यूआईडी कहा गया) जिसे आधार नाम दिया गया है, का अर्थ बुनियाद या आश्रय है। यह शब्द अधिकतर भारतीय भाषाओं में पाया जाता है अतः इसका उपयोग यूआईडीएआई के ब्राण्ड नाम एवं इसके कार्यक्रमों को भारत भर में प्रसारित करने में उपयोग किया जा सकता है।

जैसा कि, यूआईडीएआई के अध्यक्ष श्री नंदन नीलेकणी लिखते हैं ''आधार नाम यूआईडीएआई द्वारा जारी विशिष्ट संख्या के मौलिक योगदान को व्यक्त करता है, विशिष्ट संख्या सार्वभौमिक पहचान के बुनियादी ढांचे के रूप में एक नींव है। जिस पर निजी एवं सार्वजनिक क्षेत्र की एजेंसियां सेवायें एवं अनुप्रयोग बनाकर देश भर के निवासियों को लाभ पहुंचा सकती हैं''।
आधार, विशिष्टता की गारंटी एवं केन्द्रीय सजीव (आनलाइन) पहचान सत्यापन ही इन बहु-सेवाओं, अनुप्रयोगों एवं बाजारों को अधिकतम कनेक्टिविटी का आधार प्रदान करेगा।
आधार, निवासियों को देश में कभी भी एवं कहीं भी इन संसाधनों एवं सेवाओं का उपयोग करने की क्षमता प्रदान करता है।
उदाहरण के लिये- आधार, वित्त-पोषण के लिये पूरे देश में पहचान की आधारभूत सुविधा प्रदान करता है। बैंक विशिष्ट संख्या को निवासियों के बैंक खातों को जोड़कर सजीव पहचान को प्रमाणित कर निवासियों को देशभर में कभी भी, कहीं भी खातों का उपयोग करने की अनुमति दे सकते हैं।
आधार, व्यक्तिगत अधिकार के प्रभावशील प्रवर्तन के लिये नीव भी हो सकेंगे। व्यक्ति के राज्य के साथ उसकी व्यक्तिगत पहचान की स्पष्ट मान्यता एवं पंजीयन उसके अधिकारों- जैसे रोजगार, शिक्षा, खाद्य आदि को लागू करने के लिये आवश्यक है। व्यक्ति के पंजीयन, मान्यता को सुनिश्चित कर राज्य इन अधिकारों को दे सकता है।

डिजाइन, जो कि आधार के प्रतीक चिन्ह के रूप में चुना गया है, में सूर्य लाल एवं पीले रंग में अपने केन्द्र के चारों ओर अंगुलियों के निशान लिये हुए है। प्रतीक चिन्ह आधार के दृष्टिकोण को प्रभावशाली ढंग से संचारित करता है। यह चिन्ह प्रत्येक व्यक्ति के लिये अवसरों की एक नई सुबह का प्रतिनिधित्व करता है। एक सुबह जो विशिष्ट पहचान से प्रत्येक व्यक्ति के लिये उभरकर आई है।

 

यूआईडीएआई द्वारा आधार के लिये फरवरी 2010 में एक राष्ट्रव्यापी प्रतीक चिन्ह प्रतियोगिता का आयोजन किया गया था। उन्हीं सप्ताहों में देश भर से 2000 से अधिक प्रविष्टियां प्राप्त हुई थी।

विजेता प्रविष्टियों को तय करने के निम्नलिखित मानदंड थेः-

प्रतीक चिन्ह यूआईडीएआई के उद्देश्य एवं लक्ष्य का सार प्रदर्शित करने में सक्षम हो।
प्रतीक चिन्ह से यह संदेश मिलना चाहिए कि आधार, पूरे देश के निवासियों के लिये एक परिवर्तनकारी अवसर है एवं निर्धनों के लिये भी सेवाओं और संसाधनों का उपयोग समान रुप से करता है।
प्रतीक चिन्ह को देश भर में आसानी से समझा एवं संचारित किया जा सके।
प्रतीक चिन्ह प्रतियोगिता में प्राप्त अधिकांश प्रविष्टियां नवीन एवं अत्यंत उच्च गुणवत्ता की थीं। प्रस्तुत डिजाइनों का जागरूकता एवं संचार रणनीति सलाहकार परिषद संचार विशेषज्ञों से युक्त एक सलाहकारों के समूह द्वारा मूल्यांकन किया गया था।

उल्लेखित मापदण्डों के आधार पर परिषद द्वारा अंतिम दौर में पहुंचे डिजाइनों की संक्षिप्त सूची बनायी गयी। परिषद के एक सदस्य श्री किरण खलाप ने कहा ''हमें फायनल में अंतिम विजेता का चयन करने में एक कठिन निर्णय का सामना करना पड़ा।'' शुक्र है! हम चयन के मानदंड के अनुरूप से सहमत थे जिसमें पूर्वाग्रह एवं आत्मीयता बिल्कुल कम थी।

अंतिम दौर के डिजाइनर थेः
माइकल फौली
सेफरन ब्राण्ड कंसलटेंट
जयंत जैन एवं महेन्द्र कुमार
अतुल एस. पाण्डे
विजेता अतुल एस. पाण्डे का डिजाइन नीचे दर्शाया गया है।

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26 अप्रैल 2010 को विज्ञान भवन, नई दिल्ली में यूआईडीएआई के पारिस्थितिकी तंत्र इवेंट के दौरान आधार प्रतीक चिन्ह का अनावरण किया गया।

अतुल एस. पाण्डे को रू.100000/- का पुरस्कार दिया गया एवं अन्य 4 अंतिम विजेताओं को रू. 10000/- का पुरस्कार दिया गया। श्री पाण्डे ने इस अवसर पर कहा- ''मेरे लिए एक महान सौभाग्य की बात है कि मुझे यूआईडीएआई की परियोजना में योगदान देने का अवसर मिला। मेरा विश्वास है कि इस प्रतियोगिता से यूआईडीएआई द्वारा सभी के लिये समान अवसर का वादा और भी पुष्ट होगा क्योंकि हममें से बहुतों को एक सही परिवर्तनकारी परियोजना के लिए डिजाईन करने एवं इसके साथ जुड़ने का अवसर दिया''।