| बायोमैट्रिक उपकरण:- |
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आईरिेस कैमरा उपकरण कुछ दूरी से आंख की भीतर पुतली में दिखाई पड़ रहे दृश्यों के क्रमरहित नमूनों के गणितीय विश्लेषण के आधार पर व्यक्ति की पहचान का पता लगाने का काम करता है(रेन्डम)। यह कम्प्यूटर विजन, नमूनों की पहचान सांख्यिकीय अनुमान एवं प्रकाशकी को मिलाता है। आज उपलब्ध बायोमैट्रिक उपकरण एवं स्कैनर में आंख की पुतली द्वारा पहचान को ही सटीक माना जाता है। 1994 से ही आंख की पुतली द्वारा पहचान की स्वचलित विधि नवीन एवं सर्वविदित है। यह कैमरा सामान्यतः आंख की पुतली के नमूने की डिजिटल छवि लेता है एवं उसे डिजिटल कूट रूप में परिवर्तित करता है। इस इन्क्रिटेड टेम्पलेट का पुनर्निमाण कर दृश्य छवि नहीं बनाई जा सकती है। इस प्रकार यह पहचान की चोरी रोकने एवं बढ़ते अपराध की रोकथाम का उच्च स्तरीय समाधान है। छवि प्रक्रिया में लेजर अथवा चमकदार रोशनी का उपयोग नहीं होता है एवं प्रमाणीकरण अनिवार्यतः संपर्क रहित होता है। वर्तमान में बाजार में उपलब्ध व्यापारिक की पुतली कैमरे ;प्तपे ब्ंउमतंद्ध अवरक्त प्रकाश का उपयोग आंख की पुतली को प्रकाशित करने हेतु व्यक्ति को बिना हानि या असुविधा पहुंचाये करते हैं। प्रत्येक इंसान की आंख की पुतली में आंख के तारे के आसपास रंगीन छल्ले होते हैं यह हिमकण की तरह होती हैं। कोई भी दो आंख की पुतलियां समान नहीं हो सकती हैं। प्रत्येक अपनी तरह के अनूठी होती है,एवं यूटेरों में क्रमरहित रूप में विशिष्ट नमूनों का प्रदर्शन करते हैं। आंख की पुतली एक मांसपेशी है जो आंख के तारे की आकृति एवं प्रकाश की मात्रा को नियंत्रित करती है। आंख की पुतली की पहचान को कॅान्टेक्ट लेंस अथवा चश्मों के द्वारा रोका नहीं जा सकता है, इसे 10 सें.मी. से कुछ मीटर की दूरी तक से स्कैन किया जा सकता है। आंख की पुतली कई वर्षों तक स्थायी रहती है जब तक कि क्षतिग्रस्त न हो। इस तरह एक नामांकन स्कैन जीवनपर्यन्त सुरक्षित रह सकता है। कुछ चिकित्सा एवं शल्य क्रिया पुतली के आकार एवं रंग को परिवर्तित कर सकते हैं लेकिन बनावट कई दशकों तक एक सी रहती है। यहां तक कि नेत्रहीन लोग इस स्कैन प्रौद्योगिकी का उपयोग कर सकते हैं चूंकि आंख की पुतली की पहचान की प्रौद्योगिकी पुतली के नमूने पर निर्भर है, दृष्टि पर नहीं पुतली का स्कैन बायोमैट्रिक प्रमाणीकरण का एक आदर्श तरीका है क्योंकि पुतली आंतरिक अंग है जिसे व्यापक रूप से क्षति पहुंचने से सुरक्षित रखा जाता है एवं कार्निया द्वारा ढंका रहता है। यह गुण इसे अंगुलियों के निशान की तुलना में और अधिक आकर्षक बनाता है। जिसे कई वर्षों बाद कुछ प्रकार के शारीरिक श्रम के कारण पहचानना कठिन हो जाता है। |
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| बायोमैट्रिक उपकरण प्रमाणीकरण:- |
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मानकीकरण, परीक्षण एवं गुणवत्ता प्रमाणीकरण (एस.टी.क्यू.सी.) संचालनालय, सूचना प्रौद्योगिकी विभाग का संबंध कार्यालय है। जो इलैक्ट्रॅानिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी के क्षेत्रों में देश भर में फैले केन्द्रों व प्रयोगशालाओं के माध्यम से गुणवत्ता आश्वासन सेवा प्रदान करता है।
आधार परियोजना में उपयोग के लिये एसटीक्यूसी, बायोमैट्रिक उपकरणों को अस्थाई रूप से प्रमाणिकता प्रदान करता है। प्रमाणन की यह योजना उपकरणों को विश्वसनीय, सुरक्षित एवं आवश्यकता के अनुरूप बनाती है।
बायोमैट्रिक उपकरण प्रमाणन सबंधी अधिक जानकारी के लिये। यहां क्लिक करें |
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आधार परियोजना हेतु एस.टी.क्यू.सी. द्वारा अस्थाई रूप से प्रमाणित बायोमैट्रिक उपकरण निम्नलिखित हैं:
अस्वीकरीरण:- ऊपर दिखाये गये उपकरण, भा.वि.प.प्रा. किसी विशेष उपकरण के लिये प्राथमिकता का संकेत नहीं है, लेकिन सख्ती से इसका अभिप्राय उदाहरण के रूप में है। हितधारक कृपया एस.टी.क्यू.सी. द्वारा । अस्थाई रूप से बायोमैट्रिक उपकरणों की प्रमाणित सूची को देखें |




बायोमैट्रिक उपकरण
यह एक इलैक्ट्रॅानिक उपकरण है जिसे अंगुलियों के निशान के नमूने डिजिटल छवि में उतारने हेतु उपयोग में लाया जाता है। इस स्कैन को डिजिटल प्रोसेस कर बायोमैट्रिक टेम्पलेट बनाया जाता है एवं एकत्रित कर मिलान हेतु उपयोग में लाया जाता है।
बायोमैट्रिक्स में अक्सर चेहरे संबंधी पहचान प्रणाली का उपयोग चेहरे की तुलना कर पहचान सुनिश्चित करने के लिये किया जाता है। इसका उपयोग, वीडियो द्वारा चैकसी मानव कम्प्यूटर इंटरफेस एवं छवि डेटाबेस प्रबंधन के लिये भी किया जाता है। चेहरे का कैमरा दो मेगापिक्सल या अधिक का वेब कैमरा होता है जो चेहरे का स्पष्ट छवि खींचता है। वर्तमान में उपलब्ध कुछ डिजिटल कैमरे ऑटो फोकस के लिये चेहरे की परख करते हैं। खींची गयी छवि का एक भाग विशेषताओं में परिवर्तित हो जाता है। इसके बाद एक प्रशिक्षित वर्गीकार छवि का यह विशेष भाग चेहरा है अथवा नहीं का निर्णय करता है। एक चेहरा मॉडल में आभास, आकार, एवं चिन्ह हो सकते हैं।
